रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को झामुमो के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने आरोप लगाया कि देश में पंजीकृत कुछ राजनीतिक दल चुनावी गतिविधियों के बजाय कथित रूप से धन संग्रह के माध्यम के तौर पर काम कर रहे हैं।
विनोद पांडे ने ऐसी पार्टियों को कथित तौर पर ‘सेल पार्टी’ बताते हुए कहा कि इनके जरिए चंदा और अन्य माध्यमों से धन जुटाया जा रहा है। उनका आरोप है कि इसी धन का इस्तेमाल भाजपा द्वारा अलग-अलग राज्यों में सांसदों और विधायकों को अपने पक्ष में करने तथा सरकार बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, प्रेस वार्ता के दौरान इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया।
झामुमो महासचिव ने चुनाव आयोग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल चुनावी गतिविधियों में सक्रिय नहीं है या लगातार चुनाव नहीं लड़ रहा है, तो उसके पास आने वाले धन और उसके खर्च का स्रोत क्या है, इसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक दलों के चंदे, आय-व्यय और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों वाली पार्टियों की जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि उन्हें मिलने वाला धन कहां से आता है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है।
विनोद पांडे ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक संगठन का इस्तेमाल केवल धन जुटाने या राजनीतिक खरीद-फरोख्त के लिए किया जा रहा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
झामुमो ने चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों के पंजीकरण, उनके चुनावी प्रदर्शन, चंदे के स्रोत, आय-व्यय और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत समीक्षा करने की मांग की। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि जनता को यह जानकारी मिल सके कि राजनीतिक दलों को धन कहां से मिल रहा है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।
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