रांची: राजधानी रांची का मोरहाबादी मैदान रविवार को आदिवासी समाज की बड़ी जुटान का गवाह बनेगा। राज्य के सभी 24 जिलों से लोगों के पहुंचने का दावा किया गया है। अलग-अलग आदिवासी संगठनों और समुदायों की प्रस्तावित भागीदारी के बीच महाजुटान में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जमीन, विस्थापन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
महाजुटान में परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता सबसे प्रमुख होगी। आयोजकों का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन का असर आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ने की स्थिति में एसटी आरक्षित सीटों की संख्या भी आबादी और सीटों के अनुपात में बढ़ाने की मांग उठाई जाएगी।
जमीन वापसी और बाहरी बसावट पर भी जोर
महाजुटान में आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण का मुद्दा भी उठेगा। आयोजकों की मांग है कि अवैध तरीके से हस्तांतरित जमीन की पहचान कर उसे मूल रैयतों या उनके उत्तराधिकारियों को वापस किया जाए। पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में बाहरी बसावट को नियंत्रित करने और आदिवासी हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी होगी।
75 साल के विस्थापन का हिसाब मांगेंगे
आयोजक पिछले 75 वर्षों के दौरान आदिवासी समाज के विस्थापन, जमीन के नुकसान और सांस्कृतिक क्षति का आकलन कराने की मांग भी रखेंगे। प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की गारंटी को लेकर सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग होगी।
सुबह से शहर में दिखेगा जुटान का असर
महाजुटान में शामिल होने के लिए विभिन्न जिलों से लोगों के सुबह से रांची पहुंचने की बात कही गई है। कई स्थानों से लोग जुलूस के रूप में मोरहाबादी मैदान पहुंचेंगे। बड़ी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया है। मोरहाबादी और आसपास के इलाकों में बड़े वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
महाजुटान को केवल एक रैली के बजाय आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जमीन के अधिकार और संवैधानिक संरक्षण से जुड़े सवालों को एक मंच पर उठाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
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